भानुप्रतापपुर, कांकेर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भानुप्रतापपुर में इलाज में कथित लापरवाही के चलते प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने CHC के खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. शचिन्द्र कुमार गोटा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर द्वारा 22 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक ESTB/24389/2026-HEALTH SECTION-1 के अनुसार, प्रसूता के उपचार में लापरवाही के आरोपों को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत यह कार्रवाई की गई है।
क्या था पूरा मामला?
ग्राम चाहचाड़ निवासी कमलेश कोमरा 15 मई 2026 को प्रसव पीड़ा से तड़प रही अपनी पत्नी द्रोपदी कोमरा को भानुप्रतापपुर CHC लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि दो दिनों तक उन्हें समय पर इलाज नहीं मिला। सोनोग्राफी के लिए भी उन्हें निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में प्रसव हुआ, लेकिन जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात ने दम तोड़ दिया। इसके कुछ घंटे बाद मां द्रोपदी की भी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया और आखिरकार शासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए CHC के BMO को निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान डॉ. गोटा का मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर संभाग निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार वे सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। साथ ही उन्हें मूलभूत नियम-53 के तहत जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
उल्लेखनीय है कि CHC भानुप्रतापपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इस घटना के बाद ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। शासन की इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है।