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वाड्रफनगर से रिपोर्ट —
जहाँ ज्ञान दिया जाना चाहिए, वहाँ अज्ञान बाँटा जा रहा है।
जहाँ भविष्य सँवारा जाना चाहिए, वहाँ भविष्य से खेला जा रहा है।
वाड्रफनगर विकासखंड के कोगवार गांव के प्राथमिक शाला मचानडांड़ से आई ये तस्वीरें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करती हैं।
क्लासरूम में शिक्षक बच्चों को अंग्रेजी के Days of the Week सिखा रहे थे —
लेकिन ब्लैकबोर्ड पर “Sunday” की जगह “Sanday” और “Wednesday” की जगह “Wensday” लिखा गया था।
मासूम बच्चे वही गलतियाँ दोहराते जा रहे थे।
फिर जब Body Parts सिखाए गए —
👃 “Nose” बन गया “Noge”
👂 “Ear” बन गया “Eare”
👁️ “Eye” बन गया “Iey”
और कोई सुधारने वाला नहीं था।
इतना ही नहीं, Mother, Father, Brother, Sister के भी गलत स्पेलिंग लिखवाए गए।
शिक्षक अपनी गलती से पूरी तरह अनजान रहे — और बच्चे वही गलतियाँ अपनी कॉपी में उतारते रहे।
🧠 सोचिए…
जब “शिक्षक” ही गलत सिखा दें, तो उन बच्चों का भविष्य कैसा बनेगा?
क्या ये सिर्फ स्पेलिंग की गलती है, या पूरी शिक्षा प्रणाली की कमजोरी का संकेत?
📢 माता-पिता मेहनत कर बच्चों को स्कूल भेजते हैं ताकि वे बेहतर जीवन पाएँ,
पर जब ऐसे दृश्य सामने आते हैं —
तो सवाल उठता है:
> “क्या हमारे सरकारी स्कूलों में बच्चे सच में पढ़ रहे हैं — या सिर्फ हाजिरी भर रहे हैं?”
📸 यह घटना अब प्रशासन की आंख खोलने वाली होनी चाहिए।
क्योंकि गलती ब्लैकबोर्ड पर नहीं, नीति और निगरानी में है।
✍️ अब वक्त आ गया है —
शिक्षा को मज़ाक नहीं, मिशन बनाया जाए!