गिरदावरी में किसानों का रकबा घटा… धान बेचने में बढ़ी मुश्किलें, समाधान इंतज़ार में प्यासे किसान

रिपोर्ट-चंद्रभान साहू (बासनवाही)


बासनवाही। क्षेत्र में इस वर्ष गिरदावरी को लेकर किसानों का असंतोष चरम पर है। कई गांवों में किसानों की वास्तविक बोनी की तुलना में रकबा कम दर्ज किया गया है, जिसके चलते सरकारी धान खरीद केंद्रों में पंजीकरण से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है। गलत गिरदावरी ने किसानों के धान उठाव पर रोक लगा दी है, जिससे उनकी महीनों की मेहनत खेत से मंडी तक पहुँचने से पहले ही अटक गई है।

किसानों ने बताया कि मौसम की मार, खाद की किल्लत और पानी की कमी ने पहले ही उत्पादन को कम कर दिया था। कई जगहों पर फसल सूख गई, तो कहीं समय पर खाद न मिलने से पैदावार घट गई। ऐसे में गिरदावरी में रकबा कम दर्ज होना किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

किसानों का आरोप है कि पटवारी और गिरदावरी टीम ने बिना मौके पर सही निरीक्षण किए रकबा कम कर दिया, जिसके कारण खरीद केंद्रों का पोर्टल उनके पंजीकरण स्वीकार नहीं कर रहा। किसान कहते हैं—“धान पूरा तैयार है, लेकिन रिकॉर्ड में जमीन कम दिखने से बेच नहीं पा रहे। मेहनत हमारी, नुकसान हमारा, गलती प्रशासन की!”

शिकायतें दर्ज, लेकिन समाधान का कोई समय नहीं

कई किसानों ने बताया कि उन्होंने तहसील और राजस्व कार्यालयों में कई बार शिकायतें दीं, पर आज तक सुधार की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई जा रही। किसान रोज़ चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सुनवाई ठहर गई है।

किसान संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया

किसान संगठनों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गिरदावरी की त्रुटियाँ सीधे किसानों की आय और आजीविका पर प्रहार करती हैं।
संगठनों ने कहा—“यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ है। गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद ज़रूरी है।”

तत्काल समाधान की मांग

संगठनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि

जिन किसानों का रकबा गलत दर्ज हुआ है उनका रिकॉर्ड तुरंत सुधारा जाए,

प्रभावित गांवों में टीम भेजकर मौके पर पुनः निरीक्षण कराया जाए,

ताकि किसान अपनी उपज समय पर सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकें।


किसानों की बढ़ती चिंता

किसानों को डर है कि अगर देरी जारी रही तो धान खरीद ही रुक सकती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
फिलहाल किसान केवल इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप करेगा और उनकी मेहनत से उगी फसल सरकारी भंडारों तक पहुँच पाएगी।

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