कांकेर –भानुप्रतापपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर क्षेत्रवासी और जनप्रतिनिधि अस्पताल की कथित लापरवाही, मरीजों की मौत और एम्बुलेंस जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्थन में सामने आ गया है। समाज ने डॉक्टर और स्टाफ नर्स के साथ अभद्रता करने वालों पर कार्रवाई तथा निलंबित डॉक्टर डॉ. सविन्द्र गोटा का निलंबन निरस्त करने की मांग की है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
क्षेत्रवासियों ने एसडीएम एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि पिछले कुछ महीनों में जच्चा-बच्चा मृत्यु, मलेरिया से मौत, गंभीर मरीजों को समय पर हायर सेंटर रेफर नहीं किए जाने तथा प्रसव के बाद नवजात की मौत जैसी घटनाओं में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई मामलों में निजी अस्पतालों पर एफआईआर दर्ज हुई, जबकि सरकारी अस्पताल के जिम्मेदारों पर केवल निलंबन जैसी कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया गया।
एम्बुलेंस नहीं मिलने का भी आरोप
ग्राम सम्बलपुर निवासी लेखराज सोनी ने आवेदन में बताया कि उनकी पुत्री यामिनी सोनी को गंभीर स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। डॉक्टर ने कांकेर रेफर किया, लेकिन 108 एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हुई। कई घंटे इंतजार के बाद उपसरपंच गौरव चोपड़ा की मदद से निजी वाहन से मरीज को कांकेर ले जाना पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टरों के समर्थन में उतरा आदिवासी समाज
इधर, आदिवासी समाज ने प्रेसवार्ता कर अस्पताल में महिला डॉक्टर एवं स्टाफ नर्स के साथ हुई कथित अभद्रता की निंदा की है। समाज का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। समाज ने मांग की है कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाए तथा डॉ. सविन्द्र गोटा का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए।
आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि 8 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा तथा सम्मान का मुद्दा भी सामने आ गया है। ऐसे में प्रशासन के सामने दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने और दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की चुनौती है।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।