“कैसे जाएं साहब स्कूल?”            भारतमाला परियोजना की भेंट चढ़ा मावलीपारा हाई स्कूल का मार्ग, कीचड़ और गड्ढों से जूझ रहे छात्र

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“कैसे जाएं साहब स्कूल?”

मुकेश शुक्ला (कांकेर)

कांकेर -मावलीपारा। विकास की राह अगर बच्चों की शिक्षा में ही बाधा बन जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रही 6-लेन सड़क के निर्माण कार्य ने मावलीपारा हाई स्कूल तक जाने वाले मुख्य मार्ग की हालत बद से बदतर कर दी है।

जो सड़क कभी पक्की और सुगम थी, वह आज भारी मशीनों और डंपरों की आवाजाही से कीचड़, गड्ढों और दलदल में तब्दील हो चुकी है। स्कूल पहुंचने के लिए छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों को इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है।

फोटो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल के सामने तक पहुंचने वाला मार्ग जगह-जगह धंसा हुआ है। हल्की बारिश या पानी भरने पर यह रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा हो जाता है, जिससे हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के निर्माण के दौरान सड़क को उखाड़ दिया गया, लेकिन अब तक वैकल्पिक या नई सड़क की व्यवस्था नहीं की गई। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें रोज इसी कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाना पड़ता है।

ग्रामीणों की मांग

  • हाई स्कूल जाने वाले मार्ग का तत्काल मरम्मत एवं पक्कीकरण किया जाए।
  • निर्माण एजेंसी द्वारा स्कूल मार्ग को सुरक्षित और आवागमन योग्य बनाया जाए।
  • छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे।

सवाल यह है कि विकास परियोजनाओं की कीमत क्या स्कूली बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से चुकाई जाएगी? प्रशासन और संबंधित विभाग को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

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