शासन-प्रशासन की बेरुखी के बीच ग्रामीणों ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी: श्रमदान से बदली दुधावा बस स्टैंड की तस्वीर”

रिपोर्ट –दीनदयाल साहू दुधावा



कांकेर -दुधावा -शासन-प्रशासन की अनदेखी से परेशान दुधावा बस स्टैंड क्षेत्र के ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही जर्जर सड़क की मरम्मत कर मिसाल पेश की। लंबे समय से बदहाल पड़ी मुख्य सड़क की ओर न तो लोक निर्माण विभाग ने ध्यान दिया और न ही स्थानीय प्रशासन ने, जिसके चलते ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से गड्ढों को भरकर सड़क को चलने योग्य बनाया।

हादसों का कारण बनी थी सड़क

दुधावा बस स्टैंड के पास की मुख्य सड़क कई महीनों से बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी थी। बारिश के दौरान इनमें पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। आए दिन दुपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो रहे थे, जबकि दुकानदारों और स्थानीय लोगों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन केवल आश्वासन मिले, समाधान नहीं।

प्रशासन का इंतजार छोड़ खुद संभाली जिम्मेदारी

लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने मिलकर सड़क सुधारने का निर्णय लिया। सभी ने श्रमदान कर गड्ढों को भरने का कार्य किया, जिससे सड़क पर आवागमन पहले की तुलना में काफी सुगम हो गया।

विकास के दावों पर सवाल

ग्रामीणों के इस कदम ने एक ओर सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश किया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता को स्वयं आगे आना पड़े, तो विकास के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल, ग्रामीणों के इस सराहनीय प्रयास की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है और लोग इसे जनभागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।

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